दो दशक पहले की बात है, हमारी रेलवे कॉलोनी से सटे मुहल्ले से एक युवक पान मसाला मुंह में दाबे कॉलोनी में मंडराया करता था, बोर्ड परीक्षाओं से निकलते निकलते जवान हो चुका था. तमाम कोशिशों और बेतरह नकल के बाद वह बीए पास हो पाया, इसके बाद उसने कानपुर के उस समय नकल के लिए कुख्यात और बिना पढे पास होने वालों का स्वर्ग माने जाने वाले विधि विधालय में दाखिला लिया. जाहिर है अनुभवी था, पास हो गया. वकील बना, नहीं चला, पिछली बार सुना कि काफी मशक्कत की,कहीं जज हो गया. मैंने खुशी और अचरज जाहिर की तो दोस्त बोले अरे, इसमें क्या है ज्यादातर असफल वकील जज बन जाते हैं......... more